Viswas Raghavan:$52 मिलियन की डील, JPMorgan का विवाद और Wall Street का सबसे बड़ा टैलेंट वॉर

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वॉल स्ट्रीट पर इन दिनों भारतीय मूल के बैंकर Viswas Raghavan की बहुत ज्यादा चर्चा में है। यह एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो JPMorgan Chase से बाहर हो गए, लेकिन सिर्फ एक ही वीकेंड में Citigroup के सबसे ताकतवर बैंकर बन गए।

एक वीकेंड में बदली पूरी ज़िंदगी

फरवरी 2024 के एक शुक्रवार को Viswas Raghavan को JPMorgan के बड़े अधिकारियों ने बता दिया कि अब उनका भविष्य इस बैंक में नहीं है। बैंक अगले सोमवार को नई लीडरशिप की घोषणा करने वाला था। लेकिन रविवार तक Raghavan ने Citigroup में अपनी नई नौकरी पक्की कर ली — और उन्हें $52 मिलियन का बड़ा पैकेज भी मिला। सोमवार सुबह जब JPMorgan अपनी घोषणा करने वाला था, उससे पहले ही Citigroup का ऑफर सार्वजनिक हो चुका था।

कौन हैं यह Viswas Raghavan?

राघवन का जन्म सितंबर 1966 में हुआ था और उनका पालन – पोषण भारत में हो हुवा था । उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से फिजिक्स की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने Aston University से इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस में दोहरी डिग्री ली। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत Lehman Brothers से की, फिर JPMorgan में काम किया। वहाँ उन्होंने मेहनत करते हुए यूरोप और एशिया में इक्विटी कैपिटल मार्केट्स के ग्लोबल हेड तक का बड़ा पद हासिल किया।

विवाद क्या है?

JPMorgan में उनके खिलाफ कर्मचारियों की शिकायतें कई सालों से आ रही थीं। इस मामले की दो बार औपचारिक जांच भी हुई थी। कंपनी के CEO Jamie Dimon को भी इसकी सीधे जानकारी दी गई थी। एक समय पर उनके व्यवहार से जुड़ी समस्याओं की वजह से उनका वेतन मुआवजा भी कम कर दिया गया था। कुछ सहकर्मी उन्हें सख्त लेकिन असरदार लीडर मानते थे, और उनका मानना था कि उन्होंने यूरोप की इन्वेस्टमेंट बैंकिंग में JPMorgan को शीर्ष पर पहुँचाने में बड़ी भूमिका निभाई।

Citi में रिकॉर्ड तोड़ सफलता

Raghavan के नेतृत्व में Citi की बैंकिंग डिवीजन ने पिछले साल अब तक की सबसे ज्यादा कमाई की। यह बैंक के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है, क्योंकि पहले इसे अपने बड़े competitors से पीछे समझा जाता था। 2025 में उन्होंने JPMorgan जैसे बड़े बैंकों से अच्छे और अनुभवी लोगों को भी अपनी टीम में जोड़ा। अब उन्हें Citigroup के CEO Jane Fraser के बाद अगला CEO बनने के संभावित उम्मीदवार के रूप में देखा जा रहा है।

बड़ा सवाल: परफॉर्मेंस बड़ी या कल्चर?

यह विवाद वैश्विक वित्त जगत की एक बड़ी समस्या को दिखाता है। इसमें एक तरफ कंपनियां अपनी छवि  और ऑफिस के माहौल की चिंता करती हैं, और दूसरी तरफ वे बढ़त के लिए किसी भी कीमत पर अच्छे और काबिल लोगों  को रखना चाहती हैं।

यह कहानी सिर्फ एक बैंकर की नहीं है। यह Wall Street की उस सच्चाई को दिखाती है जहाँ अक्सर पैसों और आंकड़ों को नैतिकता अच्छाई-बुराई से ज्यादा महत्व दिया जाता है।

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Note: This information is for educational purposes only. Please verify with official sources before making any financial decisions.

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