एल्युमीनियम 2026: क्यों बढ़ रहे हैं दाम और भारत पर क्या होगा इसका असर?

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एल्युमिनियम एक हल्की और चमकदार धातु है, और इसका  इस्तेमाल रसोई के बर्तनों से लेकर हवाई जहाज तक में होता है। अप्रैल 2026 में लंदन मेटल एक्सचेंज पर इसकी कीमत $3,603 प्रति टन तक पहुंच गई। यह पिछले एक महीने में 11% और पिछले साल की तुलना में करीब 48% ज्यादा है। इसकी कीमत बढ़ने के बहुत से कारण हैं।

मध्य-पूर्व संकट ने बदला समीकरण

फारस की खाड़ी में ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण दुनिया की लगभग 9% एल्यूमीनियम सप्लाई प्रभावित हो गई है। संयुक्त अरब अमीरात के EGA अल-तवीला स्मेल्टर और बहरीन के ALBA पर हमलों के बाद स्थिति और बिगड़ गई है। जानकारों का कहना है कि 2026 में दुनिया को करीब 40 लाख टन एल्यूमीनियम की कमी हो सकती है। EGA, जो खाड़ी का सबसे बड़ा एल्यूमीनियम उत्पादक है, इन्होंने कहा है कि उत्पादन सामान्य होने में कम से कम 1 साल लग सकता है।

चीन की सीमा और बिजली संकट

चीन ने एल्यूमीनियम बनाने की क्षमता को 4.5 करोड़ टन तक सीमित कर दिया है। इससे दुनिया में एल्यूमीनियम की सप्लाई पहले जितनी आसानी से बढ़ या घट नहीं पाएगी। दूसरी तरफ, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और आइसलैंड में बिजली बहुत ज्यादा  महंगी और अनिश्चित हो गई है। इससे एल्यूमीनियम बनाने वाली फैक्ट्रियो के लिए काम करना बहुत ज्यादा  मुश्किल हो रहा है।

रीसाइक्लिंग अकेला समाधान नहीं

रीसाइक्लिंग पर्यावरण के लिए जरूरी है, लेकिन यह अकेले जरूरत पूरी नहीं कर सकती। पुराना एल्यूमीनियम हर समय और हर जगह बराबर मात्रा में उपलब्ध नहीं होता। इसके अलावा, कुछ खास तरह के मिश्र धातु  बनाने के लिए सिर्फ नया प्राथमिक एल्यूमीनियम ही इस्तेमाल करना पड़ता है।

भारत के लिए क्या मायने?

भारत में एल्युमिनियम का बहुत इस्तेमाल होता है, जैसे पैकेजिंग, गाड़ियाँ, बिल्डिंग और बिजली के कामों में। इसलिए जब इसकी दुनिया भर में कीमत और भी ज्यादा बढ़ती है, तो भारतीय कंपनियों का खर्च भी बढ़ जाता है। लेकिन दूसरी तरफ, इससे भारत की एल्युमीनियम बनाने वाली कंपनियाँ जैसे Hindalco Industries और Vedanta Limited को फायदा भी हो सकता है, क्योंकि वे ज्यादा फायदा  कमा सकती हैं।

आगे क्या होगा ?

2026 के अंत तक गर यूरोप में एल्युमिनियम का उत्पादन फिर से और ज्यादा बाद गया है,  और दुनिया में मांग कम रही, तो इसकी कीमत और भी कम हो सकती है | लेकिन अभी के समय में, युद्ध, राजनीति और ऊर्जा संकट की वजह से एल्युमीनियम का बाजार अस्थिर उतार-चढ़ाव वाला बना हुआ है।आज एल्युमीनियम सिर्फ एक धातु नहीं रह गया है, बल्कि यह ऊर्जा नीति, अंतरराष्ट्रीय राजनीति और हरित भविष्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

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Note: This information is for educational purposes only. Please verify with official sources before making any financial decisions.

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